SARKARI YOJANA: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA), जिसे पहले राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के नाम से जाना जाता था, भारत सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसे 2005 में संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था और 2 फरवरी 2006 को इसे लागू किया गया।
इस योजना का नाम 2 अक्टूबर 2009 को बदलकर “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)” रखा गया।
उद्देश्य:
MGNREGA का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को आजीविका की सुरक्षा प्रदान करना है, जिससे उन्हें वर्ष में कम से कम 100 दिनों का सुनिश्चित रोजगार प्राप्त हो सके।
मुख्य विशेषताएँ:
रोजगार की गारंटी: ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक वयस्क सदस्य को जो शारीरिक रूप से कार्य करने में सक्षम हो, 100 दिन का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित किया जाता है।
कानूनी अधिकार: यह रोजगार देने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। यदि तय समय सीमा (15 दिन) के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो आवेदक को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है।
महिलाओं की भागीदारी: इस योजना में एक तिहाई कार्यस्थल महिलाओं के लिए आरक्षित होता है।
पारदर्शिता: कार्यस्थलों पर सूचना बोर्ड लगाए जाते हैं और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) अनिवार्य है ताकि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हो सके।
मजदूरी का भुगतान: मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों के माध्यम से किया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
स्थानीय विकास: इस योजना के तहत किए गए कार्य जैसे – सड़क निर्माण, जल संरक्षण, सिंचाई, तालाब निर्माण, वृक्षारोपण आदि – ग्राम विकास को भी बढ़ावा देते हैं।
लाभ:
- ग्रामीण गरीबों को रोजगार और आय का साधन मिलता है।
- ग्रामीण पलायन में कमी आती है।
- जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण में योगदान।
- महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा।
चुनौतियाँ:
- कुछ राज्यों में योजना का सही कार्यान्वयन न होना।
- मजदूरी भुगतान में देरी।
- फर्जी जॉब कार्ड और भ्रष्टाचार।
- कार्य की गुणवत्ता में कमी।
निष्कर्ष:
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल रोजगार की गारंटी देती है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के विकास और सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देती है। उचित निगरानी और पारदर्शिता के माध्यम से यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकती है।